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रजिस्ट्री गाइड

खसरा, खतौनी और नक्शा — तीनों में फ़र्क़ क्या है?

जमीन खरीदने से पहले ये तीन काग़ज़ समझ लेना ज़रूरी है। तीनों एक ही ज़मीन को तीन अलग नज़रिए से दिखाते हैं — और किसी एक में भी गड़बड़ी हो, तो सौदा जोखिम भरा है।

JabalpurPropertyWala टीम 11 अगस्त 2026 9 मिनट पढ़ने में
जमीन के कागज़ात की जाँच — खसरा, खतौनी और नक्शा

तीनों दस्तावेज़ साथ मिलाकर देखने पर ही ज़मीन की पूरी तस्वीर साफ़ होती है।

एक लाइन में समझें: खसरा ज़मीन का ब्यौरा है, खतौनी मालिक का ब्यौरा है, और नक्शा जगह का ब्यौरा है।

जब कोई पहली बार जमीन खरीदने निकलता है, तो सबसे ज़्यादा उलझन इन्हीं तीन नामों में होती है। दलाल कहता है “खसरा साफ़ है”, बैंक वाला खतौनी माँगता है, और तहसील में नक्शे की बात होती है। असल में ये तीनों एक ही ज़मीन को तीन अलग-अलग नज़रिए से दिखाते हैं।

ज़मीन

खसरा

ज़मीन का हर टुकड़ा, उसका नंबर, रकबा और प्रकार।

मालिक

खतौनी

किस व्यक्ति के नाम कौन-कौन से टुकड़े दर्ज हैं।

जगह

नक्शा

ज़मीन असल में कहाँ है, किस आकार की, रास्ता कहाँ।

1. खसरा — ज़मीन का ब्यौरा

खसरा ज़मीन के हिसाब से बनता है। गाँव की हर ज़मीन को टुकड़ों में बाँटकर हर टुकड़े को एक नंबर दिया जाता है — यही खसरा नंबर है। जैसे किसी इंसान का आधार नंबर होता है, वैसे ही ज़मीन के हर टुकड़े का अपना खसरा नंबर होता है।

खसरे में यह जानकारी मिलती है:

  • रकबा — ज़मीन कितनी है (हेक्टेयर या एकड़ में)
  • ज़मीन का प्रकार — कृषि है, आबादी है, या व्यपवर्तित (डायवर्ट की हुई)
  • मालिक/काश्तकार का नाम
  • सिंचाई का साधन — कुआँ, नलकूप, या असिंचित
  • फ़सल का विवरण — कृषि भूमि के मामले में
खरीदार के लिए सबसे ज़रूरी बात खसरे में लिखा “ज़मीन का प्रकार” ध्यान से पढ़ें। अगर वहाँ कृषि लिखा है और आपको वहाँ घर बनाना है, तो पहले डायवर्सन (व्यपवर्तन) कराना होगा। बहुत से लोग यह जाने बिना कृषि भूमि खरीद लेते हैं और बाद में न नक्शा पास होता है, न बैंक लोन मिलता है।

2. खतौनी (B-1) — मालिक का ब्यौरा

खतौनी मालिक के हिसाब से बनती है। अगर किसी व्यक्ति के पास एक ही गाँव में तीन अलग-अलग जगह ज़मीन है, तो उसके तीनों टुकड़े एक ही खाता नंबर के नीचे एक साथ दिखेंगे — यही खतौनी है।

मध्य प्रदेश की ख़ास बात: यहाँ खतौनी को अक्सर B-1 कहा जाता है — क्योंकि MP के राजस्व रिकॉर्ड में खातेदार-वार अभिलेख का फ़ॉर्म नंबर B-1 है। अगर कोई “B-1 निकलवा लो” कहे, तो वह खतौनी की ही बात कर रहा है, कोई अलग काग़ज़ नहीं।

खतौनी में यह मिलता है:

  • खातेदार (मालिक) का नाम और पिता का नाम
  • उसके नाम पर दर्ज सभी खसरा नंबर
  • कुल कितनी ज़मीन है
  • ज़मीन पर कोई ऋण, बंधक या अन्य भार दर्ज है या नहीं
खरीदार के लिए सबसे ज़रूरी बात जो व्यक्ति आपको ज़मीन बेच रहा है, उसी का नाम खतौनी में मालिक के तौर पर दर्ज होना चाहिए। अगर वहाँ किसी और का नाम है — जैसे बेचने वाले के पिता या दादा का — तो इसका मतलब है कि नामांतरण अभी बाकी है। ऐसी हालत में रजिस्ट्री से पहले नामांतरण पूरा कराना ज़रूरी है।

3. नक्शा (भू-नक्शा) — जगह का ब्यौरा

नक्शा बताता है कि ज़मीन ज़मीन पर कहाँ है और किस आकार की है। खसरा और खतौनी दोनों लिखित काग़ज़ हैं — उनमें संख्याएँ हैं, तस्वीर नहीं। नक्शा वही तस्वीर देता है।

  • प्लॉट की वास्तविक आकृति — चौकोर, तिरछा, या अनियमित
  • चारों तरफ़ क्या है — किसकी ज़मीन, कौन सा खसरा नंबर
  • रास्ता है या नहीं — और अगर है तो कहाँ से
नक्शा देखे बिना ये दो समस्याएँ पकड़ में नहीं आतीं रास्ता सिर्फ़ काग़ज़ पर — नक्शे में रास्ता दिख रहा है, पर मौक़े पर वहाँ किसी और का कब्ज़ा है। और चारों तरफ़ से घिरा प्लॉट — जिसमें अंदर जाने का अपना रास्ता ही नहीं।

तीनों की तुलना एक नज़र में

पहलूखसराखतौनी (B-1)नक्शा
किसके हिसाब सेज़मीन के टुकड़ेमालिकजगह
मुख्य सवालयह ज़मीन कैसी है?यह किसकी है?यह कहाँ है?
क्या पता चलता हैरकबा, प्रकार, फ़सलमालिक, सभी खसरे, ऋणआकार, सीमा, रास्ता
खरीदार क्या जाँचेकृषि है या डायवर्टबेचने वाले का ही नाम है?मौक़े से मिलान

ऑनलाइन कैसे देखें

मध्य प्रदेश सरकार के भू-अभिलेख पोर्टल पर ये तीनों घर बैठे देखे जा सकते हैं। पोर्टल का नया संस्करण WebGIS 2.0 है, जिसमें इंटरैक्टिव नक्शा और व्यपवर्तन शुल्क कैलकुलेटर जैसी सुविधाएँ भी जुड़ी हैं।

  • आधिकारिक पोर्टल: mpbhulekh.gov.in
  • साधारण खसरा, खतौनी और नक्शा देखने के लिए कोई शुल्क नहीं, लॉगिन भी ज़रूरी नहीं
  • चाहिए: ज़िला, तहसील, गाँव और खसरा नंबर
⚠️ यह बात ज़रूर समझें: पोर्टल से मुफ़्त में मिलने वाली प्रति सिर्फ़ जानकारी के लिए होती है। रजिस्ट्री, बैंक लोन या किसी भी कानूनी काम के लिए शुल्क देकर प्रमाणित प्रतिलिपि लेनी पड़ती है।

ऑनलाइन देखना काफ़ी क्यों नहीं है

  • रिकॉर्ड अपडेट होने में समय लगता है — हाल का नामांतरण अभी ऑनलाइन न दिखे, यह मुमकिन है
  • पुरानी ज़मीनों की चेन लंबी होती है — ऑनलाइन सिर्फ़ मौजूदा स्थिति दिखती है, पिछले 30 साल की मालिकाना श्रृंखला नहीं
  • अदालती विवाद अलग से देखने पड़ते हैं — मुक़दमा चल रहा हो, यह खसरे में नहीं लिखा होता

इसलिए ऑनलाइन रिकॉर्ड को पहली जाँच मानें, आख़िरी नहीं।

खरीदने से पहले की चेकलिस्ट

  • खतौनी में बेचने वाले का ही नाम है? — नहीं तो पहले नामांतरण कराएँ
  • खसरे में ज़मीन का प्रकार क्या है? — कृषि है तो डायवर्सन ज़रूरी
  • खतौनी में कोई ऋण या बंधक तो दर्ज नहीं?
  • नक्शे और मौक़े की ज़मीन मेल खाती है? — आकार और सीमाएँ मिलाएँ
  • रास्ता नक्शे में भी है और ज़मीन पर भी?
  • प्रमाणित प्रतिलिपि ली है? — मुफ़्त वाली प्रति कानूनी काम के लिए नहीं चलती

हमारी सलाह

इन तीनों काग़ज़ों को पढ़ना सीख लेना हर खरीदार के लिए फ़ायदेमंद है — कम से कम इतना कि आप ख़ुद देख सकें कि नाम सही है या नहीं, और ज़मीन कृषि है या डायवर्ट।

जबलपुर में हम हर प्रॉपर्टी के लिए यह जाँच सौदा तय होने से पहले करते हैं, बाद में नहीं। अगर आप कोई ज़मीन देख रहे हैं और काग़ज़ात को लेकर उलझन है, तो हमसे बात कर लीजिए — जाँच में कोई शुल्क नहीं लगता।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

खसरा और खतौनी में क्या फ़र्क़ है?
खसरा ज़मीन के हिसाब से बनता है — एक खसरा नंबर यानी ज़मीन का एक टुकड़ा, और उसमें उस टुकड़े का रकबा, प्रकार और मालिक का नाम होता है। खतौनी मालिक के हिसाब से बनती है — एक व्यक्ति के गाँव में जितने भी टुकड़े हैं, वे सब एक खाता नंबर के नीचे एक साथ दिखते हैं।
मध्य प्रदेश में खतौनी को B-1 क्यों कहते हैं?
मध्य प्रदेश के राजस्व रिकॉर्ड में खातेदार-वार अभिलेख का फ़ॉर्म नंबर B-1 है, इसलिए यहाँ खतौनी और B-1 एक ही दस्तावेज़ के दो नाम हैं। अन्य राज्यों में इसी को सिर्फ़ खतौनी या अधिकार अभिलेख कहा जाता है।
क्या MP Bhulekh से मुफ़्त में खसरा-खतौनी देख सकते हैं?
हाँ, साधारण खसरा, खतौनी और भू-नक्शा बिना शुल्क और बिना लॉगिन के देखे जा सकते हैं। लेकिन यह मुफ़्त प्रति सिर्फ़ जानकारी के लिए होती है — रजिस्ट्री, बैंक लोन या अदालती काम के लिए शुल्क देकर प्रमाणित प्रतिलिपि लेनी पड़ती है।
तीनों में सबसे पहले क्या जाँचें?
सबसे पहले खतौनी (B-1) में देखें कि जो व्यक्ति ज़मीन बेच रहा है, उसी का नाम मालिक के रूप में दर्ज है या नहीं। फिर खसरे में ज़मीन का प्रकार देखें — कृषि है तो डायवर्सन ज़रूरी होगा। आख़िर में नक्शे से मिलान करें कि मौक़े पर दिखाई गई ज़मीन वही है जो काग़ज़ में लिखी है।
खसरे में नाम किसी और का है, पर बेचने वाला कहता है ज़मीन उसकी है — क्या करें?
यह सबसे आम स्थिति है, और अक्सर वजह यह होती है कि विरासत में मिली ज़मीन का नामांतरण नहीं हुआ। रजिस्ट्री से पहले नामांतरण पूरा कराना ज़रूरी है। बेचने वाले से वारिसान प्रमाण पत्र और पिछली रजिस्ट्री की प्रति माँगें, और नामांतरण की स्थिति तहसील से जाँचें।

अस्वीकरण: यह लेख सामान्य जानकारी के लिए है, कानूनी सलाह नहीं। भू-अभिलेख से जुड़े नियम, शुल्क और प्रक्रियाएँ समय-समय पर बदलती रहती हैं। किसी भी सौदे से पहले संबंधित तहसील कार्यालय या योग्य वकील से पुष्टि अवश्य करें। JabalpurPropertyWala किसी सरकारी विभाग से संबद्ध नहीं है।